Vedic Astrology में नक्षत्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। प्रत्येक नक्षत्र एक विशेष डिग्री रेंज में आता है जो किसी जातक की कुंडली में ग्रहों की सटीक स्थिति को दर्शाता है। यह लेख Nakshatra Degrees यानी नक्षत्र डिग्री के गहरे रहस्यों को उजागर करेगा और बताएगा कि ये डिग्री कैसे जीवन के हर पहलू को प्रभावित करती हैं।
What are Nakshatras: नक्षत्र क्या होते हैं?

नक्षत्र वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा के पथ के आधार पर बनाए गए 27 खगोलीय मंडल होते हैं। हर नक्षत्र का विस्तार 13°20′ (तेरह डिग्री और बीस मिनट) होता है। ये नक्षत्र चंद्रमा की गति को प्रभावित करते हैं और जातक के मन, भावनाओं और कर्मों को निर्धारित करते हैं।
👉 पूरे राशि चक्र (Zodiac) में 360 डिग्री होती हैं, जिसे 27 नक्षत्रों में बाँटा गया है।
👉 हर राशि (Sign) 30 डिग्री की होती है।
👉 हर नक्षत्र में 4 पाद (quarters) होते हैं, प्रत्येक पाद 3°20’ का होता है।
Importance of Nakshatra Degrees: नक्षत्र डिग्री का महत्व
नक्षत्र डिग्री यह तय करती है कि कोई ग्रह किस नक्षत्र और किस पाद में स्थित है। इससे हमें यह जानने में मदद मिलती है कि जातक की व्यक्तित्व, मनोभावना, जीवन की दिशा, और कर्मों की प्रकृति कैसी होगी।
- चंद्रमा की डिग्री से जनम नक्षत्र (Birth Star) पता चलता है।
- किसी भी ग्रह की नक्षत्र डिग्री से उसकी गुणवत्ता और शक्ति का ज्ञान होता है।
- यह दशा प्रणाली (Dasha system) के निर्धारण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- वैवाहिक मेल (Kundli Milan) में भी यही डिग्री गूण मिलान का आधार बनती है।
उदाहरण: यदि चंद्रमा 4°30′ तुला राशि में है, तो वह स्वाति नक्षत्र के अंतर्गत आता है, और उसका पाद होगा दूसरा (Pada 2)।
Zodiac Signs and Their Nakshatra Degrees: राशियाँ और उनके नक्षत्र डिग्री
नीचे प्रत्येक राशि और उसमें आने वाले नक्षत्रों की डिग्री रेंज दी गई है:
Aries | मेष (0°–30°)
- Ashwini | अश्विनी: 0° – 13°20′
- Bharani | भरणी: 13°20′ – 26°40′
- Krittika (1/4) | कृतिका: 26°40′ – 30°
Taurus | वृषभ (30°–60°)
- Krittika (3/4) | कृतिका: 30° – 40°
- Rohini | रोहिणी: 40° – 53°20′
- Mrigashira (1/2) | मृगशिरा: 53°20′ – 60°
Gemini | मिथुन (60°–90°)
- Mrigashira (1/2): 60° – 66°40′
- Ardra | आर्द्रा: 66°40′ – 80°
- Punarvasu (1/2) | पुनर्वसु: 80° – 90°
Cancer | कर्क (90°–120°)
- Punarvasu (1/2): 90° – 93°20′
- Pushya | पुष्य: 93°20′ – 106°40′
- Ashlesha | आश्लेषा: 106°40′ – 120°
Nakshatra Pada and Degrees: नक्षत्र पाद और डिग्री

हर नक्षत्र के चार पाद होते हैं:
पाद (Pada) | डिग्री रेंज |
---|---|
पहला पाद | 0° – 3°20′ |
दूसरा पाद | 3°20′ – 6°40′ |
तीसरा पाद | 6°40′ – 10°00′ |
चौथा पाद | 10°00′ – 13°20′ |
👉 हर पाद से जातक के गुण, मानसिक प्रवृत्ति और जीवन के क्षेत्र निर्धारित होते हैं।
How to Find Your Nakshatra Degree: अपनी नक्षत्र डिग्री कैसे जानें?
- जन्म तारीख, समय और स्थान की सटीक जानकारी लें।
- किसी विश्वसनीय वैदिक ज्योतिष सॉफ्टवेयर या वेबसाइट पर कुंडली बनाएं।
- चंद्रमा की डिग्री देखें और नक्षत्र सूची से मिलान करें।
- डिग्री के अनुसार नक्षत्र और उसका पाद ज्ञात करें।
उदाहरण: यदि चंद्रमा 15° वृषभ में है → यह रोहिणी नक्षत्र का तीसरा पाद होगा।
Use of Nakshatra Degrees in Life Predictions: भविष्यवाणी में नक्षत्र डिग्री का उपयोग
1. जन्म नक्षत्र और मानसिकता
चंद्रमा की डिग्री से यह तय होता है कि व्यक्ति का मन, स्वभाव और रुझान कैसे होंगे।
2. दशा प्रणाली (Dasha System)
आपका जन्म नक्षत्र यह तय करता है कि जीवन में कौन सी ग्रह दशाएं पहले आएंगी और उनके प्रभाव कैसे होंगे।
3. विवाह और गूण मिलान
कुंडली मिलान में नक्षत्र डिग्री और पाद से गुण मिलान (Ashtakoota) किया जाता है।
4. करियर और सफलता
किस ग्रह की कौन सी डिग्री में स्थिति है, इससे व्यक्ति की रुचियाँ, कार्यक्षेत्र और सफलता की दिशा का पता चलता है।
Gandanta Degrees: गंडांत डिग्री का रहस्य

गंडांत वह डिग्री होती है जहां जल तत्व की राशि समाप्त होती है और अग्नि तत्व की राशि शुरू होती है:
गंडांत क्षेत्र | डिग्री |
---|---|
कर्क – सिंह | 29°20′ – 0° |
वृश्चिक – धनु | 29°20′ – 0° |
मीन – मेष | 29°20′ – 0° |
👉 इन डिग्रियों पर ग्रह की स्थिति होने पर जातक को कठिन जीवन संघर्ष, कर्मिक चुनौतियाँ, और आध्यात्मिक उत्थान देखने को मिल सकता है।
Read More: Zodiac Sign Finder – राशि चिन्ह खोजें: अपनी राशि जानिए
FAQs: सामान्य प्रश्न: Frequently Asked Questions
प्रश्न 2: क्या सभी ग्रहों की Nakshatra Degrees मायने रखती हैं?
उत्तर:
जी हाँ, हर ग्रह की Nakshatra Degree महत्वपूर्ण होती है। विशेष रूप से चंद्रमा, राहु, केतु और शुक्र की डिग्री से व्यक्ति के मन, संबंध, करियर और आध्यात्मिक झुकाव का पता चलता है।
प्रश्न 3: Gandanta Degree क्या होती है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर:
Gandanta Degrees वे डिग्री होती हैं जो जल और अग्नि राशि के संधि बिंदु पर स्थित होती हैं (जैसे कर्क-सिंह, वृश्चिक-धनु, मीन-मेष)। इन डिग्रियों पर ग्रह होने से कर्मिक समस्याएं, भावनात्मक संघर्ष, या आध्यात्मिक परिवर्तन की संभावना होती है।
प्रश्न 4: Nakshatra Degree से जन्म नक्षत्र कैसे पता करें?
उत्तर:
आपकी चंद्रमा की डिग्री जन्म समय में देखी जाती है। उस डिग्री को Nakshatra Chart से मिलाकर पता चलता है कि कौन सा नक्षत्र और कौन सा पाद आपकी जन्म स्थिति है।
प्रश्न 5: Nakshatra Degree के आधार पर उपाय कैसे तय किए जाते हैं?
उत्तर:
यदि कोई ग्रह अशुभ पाद या गंडांत डिग्री पर स्थित हो, तो ज्योतिषीय उपाय जैसे मंत्र जाप, रत्न धारण, दान, यंत्र स्थापना आदि सुझाए जाते हैं।
निष्कर्ष: (Conclusion)
Nakshatra Degrees ज्योतिष शास्त्र का एक गूढ़ और प्रभावशाली हिस्सा है। यह केवल चंद्रमा की स्थिति नहीं, बल्कि प्रत्येक ग्रह की गहराई से व्याख्या करता है। इसके माध्यम से हम अपने जीवन की दिशा, उद्देश्य और संभावनाओं को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं।
नक्षत्र डिग्री हमारे जीवन की अदृश्य ऊर्जा को दर्शाती है जो हमारे भाग्य की दिशा तय करती है।
अस्वीकरण: (Disclaimer)
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और ज्योतिषीय अध्ययन के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। इसका उपयोग किसी पेशेवर सलाह, उपचार या निर्णय के स्थान पर न किया जाए। पाठकों से अनुरोध है कि किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी से व्यक्तिगत सलाह अवश्य लें।